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रामायण रिसर्च काउंसिल का परिचय

‘रामायण रिसर्च काउंसिल’ समाज एवं राष्ट्रहति में कई प्रकल्पों पर कार्य कर रही है। काउंसिल शायद देश की एकमात्र ऐसी संस्था है जो हमारे जीवन की आधार जगतजननी मां सीताजी की प्राकट्य-स्थली सीतामढ़ी (बिहार) को शक्ति-क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए भी कार्य करती है और हमारे आराध्य प्रभु श्रीरामलला के जन्म-स्थान अयोध्या में 492 वर्षों के मंदिर संघर्ष पर अब तक का सबसे बड़ा साहित्य-ग्रंथ भी तैयार करती है। विस्तार से जानें तो काउंसिल अयोध्या को विश्व पटल पर लाने के लिए, श्रीराम मंदिर संघर्ष, विषय पर अब तक के सबसे वृहद साहित्य, ग्रंथ ‘श्रीरामलला – मन से मंदिर तक’ ( हिन्दी भाषा में 1250 पृष्ठों में पूर्ण है तथा कई भाषाओं में अनुवाद का संकल्प) को जनमानस में लेकर आई, तो वहीं भगवती श्रीसीताजी के प्राकट्य क्षेत्र सीतामढ़ी में भी 51 शक्तिपीठों से मिट्टी एवं ज्योत लाकर ‘एक अखण्ड ज्योत’ एवं ‘श्रीचतुर्भुजा महालक्ष्मीजी’ को गर्भ-गृह में स्थापित करते हुए सीतामढ़ी को शक्तिक्षेत्र के रूप में विकसित करने के प्रति संकल्पित है। 

काउंसिल का उद्देश्य केवल एक मंदिर का निर्माण करना ही नहीं है, बल्कि काउंसिल इसे एक “सांस्कृतिक-पुनर्जागरण” का कार्य मानकर लक्ष्य निर्धारित की हुई है। इसको ध्यान में रखते हुए काउंसिल सीतामढ़ी में “विश्व-नारी-शक्ति-केंद्र” को भी स्थापित करना चाहती है जो विश्वभर की मातृशक्ति के प्रेरणा और आदर्श का केंद्र बने। इन पर रोचक एवं शोधपूर्ण साहित्य-सृजन सतत तैयार कर रही है। इसके साथ ही देशभर में मां सीताजी के प्रेरणादायी जीवन-आदर्शों का जन-जन तक प्रसार हेतु ‘श्रीजानकी-कथा’ का आयोजन भी किया जा रहा है जो श्रीजानकी कथा 12 वर्ष के वैदेहीनंदन वेदांत जी कह रहे हैं। पहली श्रीजानकी कथा उत्तराखंड के नैनीताल में रामनगर स्थित सीताबनी (पाटकोट रेंज) में आयोजित हुई। यह स्थान भी रामायण-काल से जुड़ा है और मां सीताजी से जुड़े कई प्रसंग यहां वर्णित हैं।

काउंसिल पिछले तीन वर्षों से अधिक समय से संस्कृत भाषा में पाक्षिक पत्रिका ‘रामायण वार्ता’ का प्रकाशन का कार्य भी करती रही है।

श्रीजानकी-कथा वाचक बाल-व्यास पूज्य वैदेहीनंदन वेदांत जी

आप देश में वैदेहीनंदन वेदांतजी के रूप में जाने जाते हैं। वैदेहीनंदनजी इस देश के पहले ऐसे बाल-व्यास हैं जो देशभर में श्रीजानकी-कथा का वाचन करते हैं। आप श्रीमहालक्ष्मी-स्वरूपा मां जानकीजी के अनन्य उपासक हैं।
आप पर बहुत ही अल्प-आयु से ही श्रीजानकीजी की विशेष कृपा रही है। मानो ऐसा प्रतीत हो रहा हो कि प्रभु श्रीराघव सरकार एवं मां जानकीजी ने अपनी विशेष कृपा से उन्हें गढ़ा हो। यही कारण रहा कि 7 वर्ष की आयु में ही वैदेहीनंदनजी को सुंदरकांड कंठस्थ हो गया। ढेरों पत्र-पत्रिकाओं एवं मीडिया घरानों ने उन्हें कवर भी किया।

आपके गुरु श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर पूज्य स्वामी सांदीपेंद्र जी महाराज हैं जो मध्य प्रदेश में मां बगलामुखी मंदिर प्रांगण के प्रमुख संत हैं।

वैदेहीनंदन वेदांतजी इतनी कम आयु में ही सनातन विषयों, कविता लेखन, संस्कृत-भाषा और माँ सीता के जीवन-आदर्शों पर गूढ़ अध्ययन रखते हैं।
उन्होंने अपने गुरु के मार्गदर्शन में माँ जानकीजी को समर्पित पांच प्रमुख पुस्तकें पूर्ण की हैं— 1. ‘श्रीभगवती सीताजी- प्राकट्य-रहस्यम’, 2. अवतार रहस्यः कमला से किशोरी तक 3. ‘श्रीसीतारामः विवाह-उत्सव’, 4. ‘महाशक्ति सीताजी’, 5. मैथिली और मिथिला। इसके अलावा तीन अन्य पुस्तकों में से एक पद्य पुस्तक ‘वेदांत पुष्प’ की रचना की है। देवभाषा संस्कृत भाषा के शिक्षण-प्रशिक्षण हेतु ‘आइए देवभाषा सीखें’ लिखी है और बच्चों में संस्कार के संवर्धन के लिए ‘मानस में बाल-संस्कार’ पुस्तक का लेखन किया है।

संकल्प से सिद्धि तक

राष्ट्र, संस्कृति और सनातन मूल्यों के संरक्षण तथा जन-जागरण के लिए समर्पित हमारे दूरदर्शी प्रकल्प और लोककल्याणकारी अभियान।

25.04.2026 : शिलापूजन समारोह में पहुंचे बिहार के मा. मुख्यमंत्री जी

सीतामढ़ी में अति प्राचीन श्रीरामजानकी मंदिर का शिलापूजन बिहार में मा. मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी जी के हाथों संपन्न हुआ। श्रीजानकी नवमी के पावन अवसर पर उक्त तिथि को मा. मुख्यमंत्री जी ने काउंसिल के प्रयत्नों की प्रशंसा की। उन्होंने काउंसिल के मैनेजिंग ट्रस्टी श्री कुमार सुशांत जी के सतत प्रयत्नों को भी सराहा।

सीतामढ़ी में मां सीताजी के प्रति काउंसिल के प्रयासों को जानिए

काउंसिल मां सीताजी को शक्ति क्षेत्र के रूप में विकसित करने हेतु वर्ष 2020 से प्रयत्नशील रही है। केंद्र सरकार और बिहार सरकार का विशेष आभार कि आपने काउंसिल के प्रयत्नों को समझा और सीतामढ़ी के अति प्राचीन (834 वर्ष प्राचीन) श्रीरामजानकी स्थान पर काउंसिल को लगभग 12 एकड़ भूमि आवंटित की।

काउंसिल प्रत्येक कुंभ पर साहित्य तैयार करती है। बीते महाकुंभ पर देखें वीडियो

बीते महाकुंभ पर काउंसिल को वैदेहीनंदन वेदांतजी ने अपना विचार देकर ‘कॉफीटेबल-बुक’ – “महाकुंभ का महामंथन” के रूप में एक बड़ा विस्तृत साहित्य तैयार करवाया।
मा. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र भाई मोदी जी का विशेष आभार कि आपने रामायण रिसर्च काउंसिल की फ़ाउंडर श्रीमती ऋतु ठाकुर जी के आग्रह पर इसमें अपना विचार प्रेषित किया।

गीता मनीषी पूज्य स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज क्या कहते हैं, ये सुनिये

19 मई 2025 को बिहार सरकार अंतर्गत बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद ने काउंसिल को जब भूमि आवंटित की गई तो 10 जून 2026 को नई दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब में एक प्रेस वार्ता के दौरान गीता मनीषी पूज्य स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज जी ने क्या कहा यह जानिए।

श्रीराम मंदिर संघर्ष पर ग्रन्थ लेखन पर पूज्य स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज के विचार

काउंसिल ने श्रीराम मंदिर संघर्ष पर एक ग्रन्थ (श्रीरामलला- मन से मंदिर तक) को हिंदी भाषा में तैयार किया है। इस ग्रन्थ के लेखक श्री कुमार सुशांत और सह-लेखक श्री अजय भट्ट जी (मा. सांसद, नैनीताल-उधमसिंहनगर) हैं। हिंदी भाषा में तैयार ग्रन्थ के प्रेजेंटेशन एवं ब्रांडिंग पर श्री केवल कपूर जी ने कार्य किया है।

छोटे बच्चों में संस्कार के संवर्धन हेतु "रामायण मंच" के द्वारा संकल्प

काउंसिल के तत्वावधान में छोटे बच्चों में संस्कार का संवर्धन कैसे हो, इसके लिए काउंसिल शुरू से ही प्रयत्नशील रही है। इसके अंतर्गत वैदेहीनंदन वेदांतजी 7 वर्ष की आयु से ही श्रीरामचरितमानस की चौपाई का वाचन करते कर छोटे बच्चों एवं अभिभावकों को प्रेरित करते आए हैं। आज भी हमारी एक टीम जगह-जगह इस पर कार्य करती रही है।

संकल्प-सीतामढ़ी

जगतजननी मां जानकीजी से जुड़े क्षेत्रों का सांस्कृतिक संवर्धन

हम माता सीताजी से जुड़े स्थलों के सांस्कृतिक विकास के संवर्धन हेतु कार्य करने प्रति संकल्पित हैं। इस निमित्त मां सीतीजी के प्राकट्य क्षेत्र सीतामढ़ी (बिहार) को शक्ति-क्षेत्र के रूप में विकसित करने के साथ पूरे क्षेत्र के सांस्कृतिक-पुनरूत्थान एवं सीतामढ़ी में विश्व-नारी-शक्ति-केंद्र की स्थापना करना चाहते हैं, जो विश्व की नारी समाज के लिए वो प्रेरणा की मूर्ति बने।

काउंसिल यहां कई चरणों में कार्य कर रही है।

मां सीताजी के आदर्शों के प्रसार हेतु "श्रीजानकी-कथा"

रामायण रिसर्च काउंसिल का उद्देश्य केवल एक मंदिर का निर्माण करना ही नहीं है, बल्कि मां सीताजी के प्रेरणादायी जीवन-आदर्शों को विश्वभर में ले जाना है। श्रीजानकीजी पर कथा के साथ हर मातृशक्ति को यह बोध कराना कि उनमें श्रीसीता-तत्त्व एवं श्रीभगवती-तत्त्व है। वह तत्त्व क्या है, इस पर विशेष व्याख्या करना… जैसे विषय श्रीजानकी कथा का उद्देश्य होता है। इसके कथाव्यास 12 वर्षीय वैदेहीनंदन वेदांतजी हैं जो श्रीजानकी कथा मर्मज्ञ बाल व्यास हैं और जो श्रीजानकीजी से संबंधित कई पुस्तकें भी लिख चुके हैं। श्रीजानकी-कथा पूरे देशभर में हो, इसके लिए 11 मई 2026 को नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन-क्लब में-क्लब में प्रेस-वार्ता का आयोजन कर संकल्प लिया गया जिसमें काउंसिल के पदाधिकारी एवं कई प्रतिष्ठित संत सम्मिलित हुए। पहली श्रीजानकी कथा उत्तराखण्ड में रामनगर ज़िला में पाटकोट रेंज स्थित सीताबनी में आयोजित हुई जो काउंसिल के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के अध्यक्ष श्री अजय भट्ट जी (उत्तराखण्ड में नैनीताल-धमसिंह-नगर से सांसद) के नेतृत्व में आयोजित हुई। वहां के बाद पूरे देशभर में यह श्रीजानकी-कथा निर्बाध रूप से सतत चल रही है।

श्रीजानकी-कथा हेतु संपर्क करें

अगर आप भी अपने क्षेत्र में श्रीजानकी-कथा का आयोजन करना चाहते हैं तो हमसे संपर्क करें। काउंसिल माताओं-बहनों को समाज में संबल प्रदान करने के ही मां सीताजी पर ये अभियान संचालित कर रही है। अतः आप मां जानकीजी पर कथा करवाकर आप समाज को एक नारी वंदन, सशक्तिकरण एवं सांस्कृतिक चेतना की ओर अग्रसर करने में अपनी प्रमुख भूमिका भी निर्वहन करेंगे।
अधिक जानकारी हेतु विजिट करें: www.jankikatha.com

श्रीराम मंदिर संघर्ष पर 'ग्रंथ श्रीरामलला- मन से मंदिर तक'

‘रामायण रिसर्च काउंसिल’ (ट्रस्ट) देश की एकमात्र ऐसी संस्था है जो सीतामढ़ी में मां सीताजी को शक्ति-स्वरूपा के रूप में स्थापना करने के संकल्प के साथ-साथ, प्रभु श्रीरामजी की जन्मभूमि अयोध्या पर भी कई भाषाओं में विस्तृत ग्रंथ को जनमानस में लाने की दिशा में कार्य करती रही है। इस हेतु काउंसिल ने अयोध्या में श्रीराम-मंदिर संघर्ष पर वृहद शोधपरक साहित्य-स्वरूप ग्रंथ (1250 पृष्ठों का ‘श्रीरामलला- मन से मंदिर तक’) को हिन्दी भाषा में तैयार कर लिया है। यह ग्रंथ लोकप्रिय प्रधानमंत्री आ. श्री नरेंद्र भाई मोदी जी के विशेष मार्गदर्शन के बाद ही पूर्ण हो सका है। वर्तमान में ग्रंथ के अंग्रेजी भाषा का अनुवाद किया जा रहा है जिसके उपरांत अन्य अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में इसका अनुवाद होकर विश्व के लोकप्रिय पुस्तकालयों में इसे रखना उद्देश्य है।

राष्ट्रहित में सांस्कृतिक चेतना के जागरण हेतु साहित्य-सृजन पर सतत कार्य

काउंसिल, राष्ट्र के सांस्कृतिक-उत्कर्ष के संवर्धन हेतु साहित्य-सृजन पर विशेष कार्य करती रही है। ‘सनातन संग भारत’, अमृतकाल की सांस्कृतिक यात्रा जैसी पुस्तकें… माता सीताजी के प्रेरणादायी जीवन-आदर्शों पर आधारित कई पुस्तकें- श्रीभगवती सीता- महाशक्ति साधना, मैथिली एवं मिथिला, महाशक्ति श्रीसीता, श्रीरामलला की किशोरी सीता, श्रीभगवती सीता-प्राकट्य रहस्यम्, श्रीसीताराम-विवाह उत्सव… वहीं बच्चों में संस्कार संवर्धन हेतु ‘मानस में बाल-संस्कार’ समेत कई ज्ञानवर्द्धक-पुस्तकों के अलावा काउंसिल ने वर्ष 2025 में प्रयागराज में आयोजित ऐतिहासिक महाकुंभ पर सबसे वृहद व आकर्षक कॉफीटेबल-बुक शीर्षक- ‘महाकुंभ का महामंथन’ को हिन्दी तथा अंग्रेजी भाषा में तैयार किया है तथा प्रत्येक कुंभ पर साहित्य-सृजन का संकल्प भी लिया।

छोटे बच्चों में संस्कार संवर्धन हेतु 'रामायण मंच' का आयोजन

हम छोटे बच्चों में अनुशासन एवं संस्कार की भावना के प्रसार हेतु उन्हें श्रीरामचरितमानस का ज्ञान देते हैं। कुछ चौपाइयों को याद करवाते हैं और उन्हें रिकॉर्ड कर उसे ‘रामायण मंच’ नाम के यू-ट्यूब चैनल पर डालते हैं। ऐसे बच्चों के वीडियो प्रसारित होने से दूसरे बच्चे एवं अभिभावकों में प्रतिस्पर्धी भावना का प्रसार होता है। इससे कई घरों में श्रीरामचरितमानस का घरों में न केवल रखना, बल्कि अध्ययन शुरू होना भी देखा गया है। इसके लिए एक शॉर्ट-टर्म सर्टिफिकेट कोर्स भी प्रारंभ किया जा रहा है। इसके लिए ‘मानस में बाल-संस्कार’ पुस्तक को आधार बनाकर प्रशिक्षित किया जा रहा है।

देवभाषा संस्कृत के शिक्षण-प्रशिक्षण एवं पाक्षिक पत्रिका "रामायण वार्ता"

वहीं, देवभाषा संस्कृत को प्रोत्साहन प्रदान करने हेतु संस्कृत भाषा के शिक्षण-प्रशिक्षण संबंधी 60 दिनों के एक कोर्स मोड्यूल पर आधारित पुस्तक ‘आओ संस्कृत सीखें’ को तैयार किया है। संस्कृत भाषा में पाक्षिक पत्रिका ‘रामायण वार्ता’ का पिछले तीन वर्षों से प्रकाशन एवं संस्कृत भाषा में समाचार एवं संस्कृति पर आधारित एक वेबसाइट www.RamayanVarta.com का क्रियान्वयन भी करते रहे हैं। हम संस्कृत भाषा के उत्थान के लिए कार्य करने वाले महानुभावों को हर वर्ष ‘संस्कृत भूषण सम्मान’ भी प्रदान करते रहे हैं।

संस्कृत भाषा में सांस्कृतिक एवं प्रमुख समाचार को पढ़ने के लिए

प्रभु श्रीराम के आदर्श-पथ पर चलने वालों को रामायणी सम्मान

भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, साहित्य, शोध, कथा-वाचन, संगीत एवं सामाजिक जागरण के क्षेत्र में रामायण आधारित उत्कृष्ट योगदान देने वाले विभूतियों को सम्मानित करने हेतु “रामायणी सम्मान 2026” का आयोजन किया जा रहा है।
यह आयोजन राष्ट्रव्यापी स्तर पर होगा, जिसमें विभिन्न राज्यों से विद्वानों, कथावाचकों, शोधकर्ताओं, कलाकारों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं का चयन किया जाएगा। वहीं अगर कोई देश के बाहर भी रह रहा हो और उनका इस दिशा में योगदान है तो उन्हें भी हम यह सम्मान दे सकते हैं, ऐसा प्रस्ताव है। प्रथम “रामायणी सम्मान” 18 अगस्त 2026 को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में आयोजित होने जा रहा है।

रामायणी सम्मान (Ramayani Award)- 2026

नामांकन फॉर्म भरने हेतु कृपया नीचे दिए लिंक का अनुसरण करें ।
(Please follow the link below to complete and submit the nomination form)

काउंसिल की सांस्कृतिक यात्रा

रामायण रिसर्च काउंसिल की विविध गतिविधियों, शोध अभियानों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, संत-समागमों और जन-जागरण प्रयासों की प्रेरक एवं अविस्मरणीय झलकियाँ।